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सदन में एक परिपाटी चल गई है कि महामहिम जी के भाषण का विरोध करना,इस तरह हम संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का विरोध तो कर ही रहे हैं,साथ ही बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संविधान का भी…
हम अपनी बातों को शिष्ट आचरण से भी कह सकते हैं,इस तरह समाजवादी पार्टी का व्यवहार और आचरण लोकतांत्रिक भी नही था…
समाजवादी पार्टी का आचरण समवेत सदन ने देखा..
महामहिम ने इस सदी के सबसे बड़े उत्सव महाकुम्भ की बात कही,इस समय तक अबतक 64 करोड़ श्रद्धालु आस्था का स्नान कर चुके हैं,यह आयोजन बिना भेदभाव एक स्थान पर आमजनमानस को एकत्र कर सकता है ,इसको दुनिया ने देखा..
जब गौरव की अनुभूति करनी चाहिए तो सपा के सदस्य छीटाकशी कर रहे हैं…
अयोध्या को लेकर हमारे विरोधी उपहास उड़ाते थे,लेकिन हमको अपने सामर्थ्य पर विश्वास था,राममंदिर आंदोलन में ये लोग हर तरह से रोड़े अटकाने लगे,जब मंदिर बन गया तो ये लोग कहने लगे ..’राम तो सबके हैं’..
इसी तरह महाकुंभ को लेकर भी कहते थे,इसबार हमारा पूरा मंत्रिमंडल वहां गया और विकास की चर्चा की…
समाजवादी पार्टी शुरू से इसका उपहास उड़ाती थी,कहती थी क्या 40 करोड़ लोग आ जाएंगे?क्या व्यवस्था हो जाएगी?
ये लोग पहले उपहास उड़ाते हैं,फिर स्वीकार भी करते हैं,समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष भी खुद गए और स्नान कर आये, इसी तरह नेता विरोधी दल अब कहने लगे कि पहले सनातनी हैं फिर समाजवादी…