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सत्य | सरल | निष्पक्ष
विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ की पूरा – दिन करते रहें नारे-बाजी.
कुलपति प्रो0 शिशिर कुमार पांडेय संभाल नहीं पा रहे हैं विश्वविद्यालय कुलपति.
धरना- प्रदर्शन करते हुए छात्रों ने कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय के उपर गंभीर आरोप लगाए. सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सुनते हैं अश्लील गीत.
कुलपति को आफिस में घंटों बन्द कर किया धरना -प्रदर्शन नारेबाजी.
उत्तर प्रदेश शासन के नाम पर दिव्यांग छात्रों को कोई भी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। भोजन, छात्रावास, केंद्रीय पुस्तकालय, दृष्टि बाधित छात्रों को ब्रेल लिपि में किसी भी पाठयक्रम में पुस्तकें नहीं है। मे मेडिकल सुविधाएं कुछ भी नहीं है। छात्रों को चोट लगने, बीमार होने पर सीधे जिला चिकित्सालय , चित्रकूट भेजा जाता है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने दान के पैसे से छात्रों के लिए एक एंबुलेंस खरीदी थी वर्तमान में वह खराब हो गई है जो लखनऊ में चार महीने से खड़ी है। एक भी चिकित्सा संबंधी सुविधा बच्चों को नहीं मिल रही है। सरकारी पैसा का दुरपयोग किया जा रहा है। विभिन्न विभागों में केवल एक- एक टीचर है जैसे राजनीति विभाग, संस्कृत विभाग, दर्शन विभाग, योग विभाग, इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, समय से पाठयक्रम पुरा नही हो रहा है। कुलपति शिशिर कुमार पांडेय बस दो साल से केवल वादे कर रहे हैं कहते हैं कि शासन पैसा नहीं दे रहा है बजट का रोना रो रहे हैं। एक एक कमरे में दस दस छात्रों को हास्टल में रखा गया है। भोजन की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। सरकारी धन सब खा रहे हैं। कुलपति दिनभर मसाज कराने में बिजी हैं। महिला टीचर्स को लेकर आफिस में दिनभर बैठे रहते हैं । छात्रों की कोई भी समस्याओं को समाधान नहीं करते हैं। ब्रेल लिपि में कोई भी पुस्तकें नहीं है।यहां पर दिव्यांग छात्रों के साथ सामान्य छात्र भी पढ़ रहे हैं उनके लिए छात्रावास को कोई भी सुविधा नहीं है। जब सरकार बजट दे रही है तो केवल खानापूर्ति कर सब अधिकारी , कुलपति, कुलसचिव वित्त अधिकारी सरकारी पैसा मिलकर खा रहे हैं। कुलपति विश्वविद्यालय में कम रहते हैं हमेशा लखनऊ की यात्रा पर रहते है। जब से यह सरकारी कुलपति बन कर आए हैं अश्लील हरकतें बातें बढ़ गयी है। कोई भी कार्यक्रम में भोजपुरी सिनेमा के फ़ूहड़ गीतों को सुनते है। सरकारी बजट का दुरपयोग कर रहे हैं। हम सब छात्रों 6 महीनों से कुलपति को लिखित में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन केवल आश्वासन दिया जा रहा है। इनकी प्रशासनिक क्षमता कुछ भी नहीं है। कोई भी समस्या का समाधान नहीं करते हैं। कोई भी छात्र छात्राएं परेशानी समस्या ले जाए आफिस में मिलते भी नहीं है। कहते हैं कि यह समाधान शासन करेगा। महीनों से केवल भरोसा दिया जाता है। आंदोलनरत छातों की मांग अभी तक अधूरी है।